Friday, 10 May 2019

कबीर का बेटा था : कमाल


कबीर का बेटा था : कमाल। कबीर ने उसे नाम ही 'कमाल' दियाइसीलिये कि कबीर से भी एक कदम आगे छलांग ली उसने।

कबीर ने कहा :-
चलती चक्की देख कर, दिया कबीरा रोए।
दो पाटन के बीच में, साबुत बचा कोए।।
अर्थ - चलती चाकी देखकर (लोगो की जिंदगी चलती देखकर), कबीर साहब को रोना आता है। क्यों की इस चलने वाली जिंदगी में सब को एक दिन छोड़कर जाना है। जिंदगी और मौत ये दो पाटो(चक्की के दो पत्थर) के बीच में सभी पीस पीसकर एक दिन ख़त्म होना है। कुछ लोग इस सच्चाई को जानते हुये भी अनजान बनते है।

कमाल  ने कहा :-
चाकी चाकी सब कहे, कीली कहे ना कोय !
 जो कीली से लाग रहे वाको बाल ना बांका होय !!
चाकी की तो सब बात करते है, लेकीन जो चाकी को घुमाने वाली किली (जो दोनों पाटो के बिच में लगी होती है), उसकी कोई बात नहीं करता। इसी किली पर दोनों चाक आपस में जुड़ कर अनाज पीसते है !
जैसे अनाज का कोई दाना कीली से लगे रह जाने के कारण पीसे जाने से बचा रह जाता है ! वैसे परमात्मा रूपी किली से जुड़े रहने पर भी इस जन्म मृत्यु के झंझट से बचा सकता है ! आत्मा के बार बार के आवागमन से बचा सकता है !!

हरि तत्सत्



Wednesday, 23 January 2019

आओ जाने इंसान को कुत्ते की नस्ल में !!

http://mukeshsonimukki.blogspot.com/

वफादारी का नाम जहाँ आता है वहां कुत्तो का नाम ना आये तो प्रसंग अधूरा लगता है ! जमाने से कुत्तो की बिरादरी ने वफादारी की मिशाल पेश की है ! आज मैं उसी मिशाल की बात करता हूँ ! हो सकता है की कहने का तरीका अलग हो !
कुत्तो की जमात में अलग अलग नस्ल के कुत्ते होते है ! कुछ काफी खूबसूरत तो कुछ खतरनाक , कुछ काफी समझदार होते है तो कुछ काफी उदासीन (Moody) !!
कई नस्ल के कुत्ते तो बहुत महंगे होते है और कुछ उनसे कम महंगे तो काफी कुछ सस्ते होते है ! वैसे तो हज़ारो नस्ल के कुत्ते होते है लेकिन मैं चंद उन कुत्तो की नस्ल के नाम लिख रहा हूँ जो अनुमन सभी घरो में आसानी से उपलब्ध हो जाती है !
जैसे - बुलडॉग, जर्मन शेफर्ड, पेकिंगीस, पोमेरेनियन, पग, रोटवेईलर, लैब्राडोर, माल्टीज़, गोल्डन रिट्रीवर्स और न्यूफाउंडलैंड !
यह वो नस्ल है जो लगभग घरो में आसानी से मिल जाती है ! इनके साथ हम खेलते है , इन्हे सुबह शाम वाक पर ले जाते है ! चूमते है और गोद में उठा के प्यार करते है ! खाना साथ खिला लेते है और नहलाते भी है !  वफादारी में तो कोई शक नहीं है लेकि इनके आलसीपन और नाकारेपन के किस्से सुनने में मिल ही जायेंगे !
इन सब से अलग एक बिरादरी या एक नस्ल और होती है ! गली के कुत्तो की (Street Dogs). जिन्हे ना तो आप साथ में खाना खिलाते है और ना ही साथ नहलाते है ! गोद में उठा कर चूमना और प्यार करना तो बहुत दूर की बात है ! जब चाहा दूर से पुचकार लिया और जब चाहा दुत्कार दिया ! इन्हे आपसे कोई गिला नहीं और ना ही कोई शिकवा है !
आपने घर के बाहर बैठे इन रखवालो को रोटी के २ निवाले क्या दे देते हो यह आपके लिए वफादार हो जाते है ! सुबह शाम को छोडो अगर आपने इन्हे दिन में एक बार भी ब्रेड या रोटी का टुकड़ा दे दिया की बस इन्होने अपनी वफादारी आपके नाम कर दी ! आप घर के बाहर भी चले गए तो उसकी रखवाली भी इन्ही के जिम्मे है !
आप या आपके परिवार का कोई सदस्य घर से कही बाहर जाता है तो उसके पीछे पीछे चल देते है ! यह सोच की आपकी सुरक्षा इन्ही की जिम्मेदार बनती है ! इन्हे चाहे कोई गोद में लेके चूमे नहीं या पुचकार के कोई प्यार ना करे ! जरुरी नहीं की आप इसे साथ में खाना खिलाये या उसके साथ नहाये ! लेकिन बॉस आप उसकी वफादारी पर शक नहीं कर सकते ! ऊपर लिखी नस्ल के बारे में मैं १००% विस्वास से नहीं कह सकता की वो वफादारी में सबसे आगे हो लेकिन इनके बारे में विश्वास से कहा है !
बस बात को यही से घुमा रहा हूँ !  इंसान की नस्ल में भी यही समानता है ! मैं बताना चाहता हूँ उन्हें की तुम लाख भले की सोचना उनकी या लाख चर्चा करना अपनी वफादारी की ! तुम्हारी वफादारी पर कोई शक नहीं है ! लेकिन तुम भी गली के वही कुत्ते हो जिन्हे गोद में उठा के प्यार नहीं किया जाता ! क्यों की तुम्हारी कोई नस्ल नहीं ! तुम अपने लोगो को काट खाना और उनके खून का कतरा कतरा बहा देना ! लेकिन इंसानो की दुनिया में तुम्हारी इज़्ज़त भी दो कौड़ी की है !
तुमने हमेशा नुकसान किया है , अपने दो रोटी के निवाले पक्के करने के लिए तुमने लोगो के निवालो का नुकसान किया है ! तुम यह कभी नहीं समझ सके ! अपनी वफादारी की मिशाल देने के लिए तुम उसी पेड़ की लकड़ी हो जो कुल्हाड़ी के पीछे जुडी हो !  पेड़ काटने में दोष कुल्हाड़ी का नहीं है दोष उस लकड़ी का है जिसने कुल्हाड़ी का साथ दिया !
तुम्हारा वक़्त बीत गया या बीत जायेगा ! लेकिन किसी को ना तो तुम्हारी ईमानदारी याद रहेगी और ना ही तुम्हारी वफादारी !
याद यह रहेगा की तुमने जिनकी रोटी छीनी है , वो याद करेगा तुम्हे और जब जब याद करेगा तब तब कोसेगा !!
आशा है ईश्वर तुम्हे सद्बुद्धि दे, किसी का भला ना कर पाओ तो कम से कम बुरा करने की शक्ति तो ना दे !

हरि तत्सत्

फोटो _ गूगल से साभार



Thursday, 13 December 2018

Do not believe in politics (राजनीती पर भरोसा मत करो)


14-12-2018


आज कल के चुनावी माहौल को देखते हुए मेरे मैं मन एक विचार आया है ! हर एक प्रत्याशी का अपने चाहने वालो का उससे स्नेह रखने वालो का एक कारवां है, एक अपनी भीड़ है ! उस भीड़ में कुछ चेहरे नो तो चाहने की भी हद्द पार कर रखी है ! अपने अपने प्रत्याशी को भगवान बनाने में लगे हुए है ! और खुद उनके भक्त, दास, गुलाम !!
हज़ारो बरसो की गुलामी को, जो अब रक्त बन के शरीर की रगो में बह रही है, यूँ भुला देना संभव नहीं है ! कही कही उस गुलामी का असर अवचेतन मन के हिस्से में बैठा हुआ है ! पहले मुगलो की, राजा महाराजाओ की फिर अंग्रेजो की और अब राज नेताओ की ! गुलामी को हमने शायद अपने शरीर का ही एक हिस्सा मान लिया है !
हर एक व्यक्ति अपने अपने उम्मीदवार को सर्वश्रेष्ठ घोषित करने में और सामने वाले को पूरी तरफ से गलत, चोर और लुटेरा घोषित करने में  जी जान से जुटा हुआ है ! उस राजनेता को सपोर्ट कर रहा है जिस पर कभी भरोसा नहीं किया जा सकता ! जिस राजनेता पर भरोसा किया जा सके फिर वो राजनेता ना हुआ ! गाँधी की बातो पर लोगो ने जल्दी भरोसा इसलिए किया क्यों की गाँधी राजनितिक आदमी नहीं था, नैतिक आदमी है ! और नैतिक आदमी का सहारा ले कर राजनितिक आदमी अपना काम निकाल लेता है ! उसे अपना उल्लू सीधा करना है ! नेहरू ने भी यही किया , गाँधी के नाम का सहारा लेकर राजनीती में अपना मुकाम बनाया और आज़ाद भारत का प्रधानमंत्री बना ! और विगत वर्षो में अन्ना हज़ारे जैसे नैतिक आदमी का इस्तेमाल करके केजरीवाल मुख्यमंत्री बना !!
राजनेता पर भरोसा कर ले ऐसा कोई राजनेता शायद ही दुनिया में हो !
मेने सुना है की कल्लूराम एक राजनेता हुआ करता था ! राजनीती की दुनिया में उससे बेहतर शायद ही कोई और नेता हुआ हो ! साम दाम दंड भेद का बड़ा ज्ञाता था ! बरसो बरस से राजनीती कर रहा था ! उसको हरा पाना जल्दी संभव ना था ! हर वक़्त उसी माहौल में रंगा रहता ! उसका बेटा लल्लूराम भी उसको देख देख के बड़ा हुआ था और अपने पिता की तरह ही बड़ा राजनेता बनना चाहता था ! वो अपने पिता को बात करते हुए देखता , जनता से मिलते हुए देखता ! अपनी पार्टी और दूसरी पार्टी के लोगो से मिलते हुए देखता ! चलने का ढंग और बात करने के तरीके को सिखने की और उन्हें दोहराने का अभ्यास किया करता !
एक दिन लल्लूराम ने अपने पिता कल्लूराम से हिम्मत बाँध  के कहा की पिताजी मुझे भी राजनीती में आना है ! मुझे भी आपसे राजीनीति के दांव पेच सिखने है !
पिता कल्लूराम ने बेटे की बात को गंभीरता से लिया और कुछ सोचने के बाद अपने दोमंजिला माकन की छत पर ले गया ! और अपने बेटे से कहा की इस छत से कूद जाओ !!
बेटे ने निचे झाँक के देखा तो घबरा गया क्यों की वो काफी ऊंचाई पर खड़ा था ! और वह से निचे कूदने का मतलब यह था की अगर मरा भी नहीं तो हड्डी पसली जरूर टूट जाएगी ! उसने कूदने से मन कर दिया और कहा की आप क्या कहते हो ? अगर मैं यहाँ से कूदा तो मुझे चोट लग सकती है ! पिता ने कहा की तू नाहक फ़िक्र कर रहा है ! जब मैं तेरे साथ खड़ा हूँ तो चिंता करने की कोई बात नहीं है ! तू कूद जा ! और अपने ऊपर यकीन कर मैं तुझे कुछ नहीं होने दूंगा ! भरोसा रख कुछ नहीं होगा !
लल्लूराम पिता की बात पर यकीन करके मकान की छत से कूद गया और निचे गिरते ही बहुत चोटिल हो गया ! घुटने चटख गए हाथ की कोहली बुरी तरह से छील गयी ! ठोड़ी टूट गयी और नाक से खून बहने लगा ! उसने गुस्से में अपने पिता से कहा की कैसे पिता है आप ? अपनी औलाद के भी दुश्मन हो ! आप पर भरोसा करके कूदा था और आपने मुझे बचाने आने की बजाय कदम पीछे की तरफ खिंच लिए ! लानत है आप पर, मुझे आपसे कोई राजनीती नहीं सीखनी और अब तो मुझे आपसे बात भी नहीं करनी है, मेहरबानी करके आप यहाँ से चले जाए !!
पिता कल्लूराम को बेटे को लगी चोट का कोई दुख ना था, चेहरे पर लेस नाम सिकन नहीं थी ! अपने पिता को गंभीर मुद्रा में देख बेटे ने पिता से कुछ कहना  चाहा ! वो कुछ पूछ पता पिता कल्लूराम बोला की बेटे आज राजीनीति सिखने का पहला दिन है और पहले दिन की पहली सीख यह है कीराजनीती में कभी अपने बाप पर भी भरोसा मत करो !!”
राजीनीति का पहला सबक ही यही है की किसी का भरोसा मत करो ! तुम लोग जिनका गुणगान कर रहे हो, समय आने पर वो तुम्हारा साथ भी छोड़ देंगे ! इस राजनेताओ के चक्कर में अपना आपस का भाईचारा समाप्त ना करो ! आपकी विप्पति में आपका मित्र या पडोसी काम आएगा ये राजनेता नहीं ! सोशल मीडिया में लिखना हो या कही किसी के सामने ! शब्दों को चयन सोच समझ कर करना ! राजनेता तो साल रहेगा उसके बाद पता नहीं रहेगा या नहीं ! लेकिन आपका मित्र, आपका समंधी आपका पडोसी सदा आपके साथ रहेगा !
किसी को सपोर्ट करने में समस्या नहीं है लेकिन किसी के अंध भक्त बन जाना, उनके मानसिक गुलाम बन जाने में हानि है ! अतः अपने संबंघो में कोई खटास ना आने दे !! धन्यवाद् आपका !

मुकेश सोनी