Tuesday, 14 November 2017
Wednesday, 20 September 2017
Who is Pitra ? पितर कौन हैं ?
पितृगण कौन
हैं और यह
अस्तित्व में कैसे
आए।
सामान्य
धारणा यह है कि
जिनकी मृत्यु हो जाती है
वह पितर बन जाते हैं।
लेकिन गरूड़ पुराण से यह जानकारी
मिलती है कि मृत्यु
के पश्चात मृतक व्यक्ति की आत्मा प्रेत
रूप में यमलोक की यात्रा शुरू
करती है। सफर के दौरान संतान
द्वारा प्रदान किये गये पिण्डों से प्रेत आत्मा
को बल मिलता है।
यमलोक में पहुंचने पर प्रेत आत्मा
को अपने कर्म के अनुसार प्रेत
योनी में ही रहना पड़ता
है अथवा अन्य योनी प्राप्त होती है।
कुछ व्यक्ति अपने कर्मों से पुण्य अर्जित करके देव लोक एवं पितृ लोक में स्थान प्राप्त करते हैं यहां अपने योग्य शरीर मिलने तक ऐसी आत्माएं निवास करती हैं। शास्त्रों में बताया गया है कि चन्द्रमा के ऊपर एक अन्य लोक है जो पितर लोक कहलाता है। शास्त्रों में पितरों को देवताओं के समान पूजनीय बताया गया है। पितरों के दो रूप बताये गये हैं देव पितर और मनुष्य पितर। देव पितर का काम न्याय करना है। यह मनुष्य एवं अन्य जीवों के कर्मो के अनुसार उनका न्याय करते हैं।
गीता में भगवान श्री कृष्ण ने कहा है कि वह पितरों में अर्यमा नामक पितर हैं। यह कह कर श्री कृष्ण यह स्पष्ट करते हैं कि पितर भी वही हैं पितरों की पूजा करने से भगवान विष्णु की ही पूजा होती है। विष्णु पुराण के अनुसार सृष्टि की रचना के समय ब्रह्मा जी के पृष्ठ भाग यानी पीठ से पितर उत्पन्न हुए। पितरों के उत्पन्न होने के बाद ब्रह्मा जी ने उस शरीर को त्याग दिया जिससे पितर उत्पन्न हुए थे।
पितर को जन्म देने वाला शरीर संध्या बन गया, इसलिए पितर संध्या के समय शक्तिशाली होते हैं।
कुछ व्यक्ति अपने कर्मों से पुण्य अर्जित करके देव लोक एवं पितृ लोक में स्थान प्राप्त करते हैं यहां अपने योग्य शरीर मिलने तक ऐसी आत्माएं निवास करती हैं। शास्त्रों में बताया गया है कि चन्द्रमा के ऊपर एक अन्य लोक है जो पितर लोक कहलाता है। शास्त्रों में पितरों को देवताओं के समान पूजनीय बताया गया है। पितरों के दो रूप बताये गये हैं देव पितर और मनुष्य पितर। देव पितर का काम न्याय करना है। यह मनुष्य एवं अन्य जीवों के कर्मो के अनुसार उनका न्याय करते हैं।
गीता में भगवान श्री कृष्ण ने कहा है कि वह पितरों में अर्यमा नामक पितर हैं। यह कह कर श्री कृष्ण यह स्पष्ट करते हैं कि पितर भी वही हैं पितरों की पूजा करने से भगवान विष्णु की ही पूजा होती है। विष्णु पुराण के अनुसार सृष्टि की रचना के समय ब्रह्मा जी के पृष्ठ भाग यानी पीठ से पितर उत्पन्न हुए। पितरों के उत्पन्न होने के बाद ब्रह्मा जी ने उस शरीर को त्याग दिया जिससे पितर उत्पन्न हुए थे।
पितर को जन्म देने वाला शरीर संध्या बन गया, इसलिए पितर संध्या के समय शक्तिशाली होते हैं।
Mukesh
Soni
Tuesday, 12 September 2017
मच्छर कैसे भगाये ? How to far away Mosquito ?
मच्छर कैसे
भगाये ?
ये
है मेरा जुगाड़..
लोहे
के डिब्बे को ऐसे काटा
है की उसमे मिट्टी
का दीपक रखा जा सके ! डिब्बे
के ढक्कन को उल्टा करके
उसमे नीम का तेल और
थोड़ा सा कपूर डाल
दिया !
अब
डिब्बे में रखा दीपक जला दिया ! इससे ऊपर रखा हुआ नीम का तेल और
कपूर गरम होगा ! उसकी महक से मच्छर दूर
रहेंगे और सेहत के
लिए भी हानिकारक नहीं
है !!
धन्यवाद्
Mukesh
Soni
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